Category: पद्य आलेख

Amrata Imroz

Amrata Imroz अमृता इमरोज़ प्रेम की खुशबू से महकते दो फूल

Amrata Imroz उसने जिस्म छोड़ा है साथ नहीं वो अब भी मिलती है कभी तारों की छांव में कभी बादलों

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