Stree 2018 स्त्री तुम कल आना

Stree 2018 – राजकुमार राव के उम्दा अभिनय और हल्की गुदगुदाहट के लिए ‘स्त्री’ फिल्म देखी जा सकती है.

ओ स्त्री तुम कल आना !!!
 
राजकुमार राव के उम्दा अभिनय और हल्की गुदगुदाहट के लिए ‘स्त्री’ फिल्म देखी जा सकती है. राजकुमार का बेलाग अभिनय इस फिल्म की उपलब्धि है सब पर भारी पड़े हैं वे. बाकी ‘स्त्री विचार’ को लेकर कुछ बदलाव की उम्मीद के साथ देखेंगे तो निराश होंगे. हम जिस कंटेंट की फ़िल्म खोजने गए थे वह तो नहीं मिला।बहरहाल, फिल्म में हल्के फुल्के गीत हैं, सहायक कलाकारों का अभिनय अच्छा है. अपारशक्ति खुराना में खूब संभावनाएं हैं. क्लाइमेक्स बहोत झोलदार है. कामेडी के लिहाज से फिल्म आपको हंसाने में सफल रहती है. कामेडी संवादों पर मेहनत दिखती है.
 
हमें यह फिल्म केवल दो जगह स्तरीय लगी एक – फिल्म का वह संवाद जहाँ भूत/ प्रेत/ बाधा ( स्त्री ) के लिए कहा जाता है कि  ‘ टाटा-बिड़ला’ के घर तो नहीं आती !!! यह संवाद उस महत्वपूर्ण सूत्र को पकड़ता है जहाँ गरीबी और बेरोजगारी अंधविश्वासों से सीधा जुड़ते हैं. 
 
दूसरा जहाँ पंकज त्रिपाठी लोगों को समझाते हैं कि ‘स्त्री आपको जबरदस्ती नहीं ले जाएगी, वह पुरुष थोडा है. वह पहले आपसे अनुमति लेगी यदि आप उसकी तरफ पलटकर देखेंगे तब वह आपको ले जाएगी .’
 
फिल्म को क्या दिशा देनी है इस लिहाज में निर्देशक अमर कौशिक हमें थोडा कन्फ्यूज़ लगे.फिल्म का मध्यांतर अनपेक्षित सी जगह पर किया गया .फिर द्विअर्थी संवादों की कोई जरुरत नहीं थी .स्त्री की भूमिका को और अधिक विस्तार दिया जाना चाहिए था . कई दृश्यों में निर्देशक आपको डराने में सफल रहे हैं .
 
खालिस मनोरंजन के लिए जा रहे हैं तब आपका पैसा वसूल है.बाकी के दोस्त फिर से अमोल पालेकर की ‘पहेली’ देखिए हॉरर,प्रहसन, पटकथा और संवेदनाओं की बेजोड़ प्रस्तुती है वह फिल्म.
 
chandrakanta